छठ पूजा 2023: तारीख, कारण, उद्धरण, राज्य, कथा, उपाय

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छठ पूजा, जो की भगवान सूर्य की अराधना के रूप में मनाई जाती है, भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखती है। 2023 में यह पूजा 19 नवंबर को मनाई जाएगी। इसे क्षेत्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता है।

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महत्वपूर्ण तिथियां और मुहूर्त:

छठ पूजा का उत्सव चार दिनों तक चलता है। 2023 में इसके विविध चरणों के मुहूर्त इस प्रकार हैं:

नहाये खाये: 17 नवंबर, शुक्रवार

खरना और लोहंडा: 18 नवंबर, शनिवार

संध्या अर्घ: 19 नवंबर, रविवार

उषा अर्घ्य: 20 नवंबर, सोमवार

छठ पूजा की परंपरा और महत्व:

छठ पूजा का महत्व भारतीय संस्कृति में गहरा है। इस पूजा में भगवान सूर्य की अराधना की जाती है, जिससे जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

छठ पूजा के मनाने के पीछे कई कथाएं हैं, जिसमें से प्रमुख है भगवान राम और सीता की। उन्होंने अपने वनवास से लौटने के बाद इस पूजा की शुरुआत की थी। इसके अलावा, यह माना जाता है कि छठ पूजा सूर्य और पृथ्वी के बीच संबंध को मजबूती प्रदान करती है, जिससे पृथ्वी पर जीवन की संरचना बनी रहती है।

इस प्रकार, छठ पूजा हमें प्रकृति और उसके अद्वितीय तत्वों के प्रति समर्पण और आभार की भावना में ले जाती है।

छठ पूजा की विशेषताएं और विधियां:

छठ पूजा में विशेष रूप से जल और सूर्य की अराधना की जाती है। पूजा के दौरान, आराधक सूर्योदय और सूर्यास्त के समय नदी या तालाब के किनारे जाकर जल में खड़े होकर सूर्य की पूजा करते हैं।

छठ पूजा में व्रती द्वारा अनेक प्रकार की मिठाइयाँ और प्रसाद तैयार किए जाते हैं। उनमें थेकुआ, पुरी, खीर और अन्य पकवान शामिल हैं।

छठ पूजा का आयोजन समाज में भी बड़ी धूमधाम से होता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों को सजाते हैं, गाने गाते हैं और नृत्य करते हैं।

छठ पूजा: संस्कृति और परंपरा

छठ पूजा, बिहार और जहाँ-जहाँ हिंदी बोलने वाले लोग रहते हैं, उसका मुख्य त्योहार है। यह पूजा कठिनाई और समर्पण का प्रतीक है, जो भक्त अपनी ईश्वर में पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाते हैं।

नहाए खाए: पूजा का यह पहला दिन है जिसमें भक्त स्नान करते हैं और पवित्र भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन शुद्धता और पवित्रता को महत्व दिया जाता है।

खरना: इस दिन, भक्त जल और आहार दोनों का त्याग करते हैं। इसके बाद, उन्हें प्रसाद मिलता है, जो सभी के बीच बाँटा जाता है।

संध्या अर्घ्य: जब सूर्य डूबता है, भक्त जल में खड़े होकर उसे अर्घ्य प्रदान करते हैं। इसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।

उषा अर्घ्य और पारण: पूजा का यह आखिरी चरण सुबह होता है। भक्त सूर्योदय के समय अर्घ्य प्रदान करते हैं और इसके बाद उपवास तोड़ते हैं।

ठेकुआ: छठ पूजा के दौरान ठेकुआ एक विशेष मिठाई है जो सभी के बीच प्रसिद्ध है। इसका स्वाद सभी को पसंद आता है और इसे पूजा के प्रसाद के रूप में भी बाँटा जाता है।

छठ पूजा छठ पूजा कब है

छठ पूजा, जिसे छठ मैया की पूजा भी कहा जाता है, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में विशेष रूप से मनाई जाती है। 2023 में छठ पूजा की मुख्य तिथि 19 नवंबर को पड़ेगी। इस दिन, व्रती अर्घ्य देने के लिए नदियों और तालाबों के किनारे जाते हैं। उनका आस्था और समर्पण का अहम रोल होता है, और यह त्योहार प्रकृति और परिवार के महत्व को प्रमोट करता है।

छठ पूजा 2023 तिथि:

छठ पूजा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जिसे भारत के कई हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। 2023 में यह त्योहार 19 नवंबर को मनाया जाएगा। यह त्योहार सूर्य और छठी माता की पूजा के लिए होता है, जिसमें विशेष रूप से सूर्य को समर्पित अर्घ्य दिया जाता है। छठ पूजा का महत्व भारतीय संस्कृति में अद्वितीय है, और यह हर साल विशेष तारीखों पर मनाई जाती है।

छठ पूजा का समय आज:

छठ पूजा का समय प्रतिवर्ष तिथि के अनुसार परिवर्तित होता है। यह त्योहार सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आस-पास मनाया जाता है। आज के दिन, यदि छठ पूजा हो, तो लोग सूर्य को अर्घ्य देने के लिए स्नानागार, नदी या तालाब के किनारे जाते हैं।

छठ पूजा कारण:

छठ पूजा का मुख्य कारण सूर्य और छठी माता की पूजा है। यह त्योहार पृथ्वी पर सूर्य के महत्व को मान्यता देने और उसकी कृपा प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। इसके अलावा, यह त्योहार सूर्य और उसके उपकारों की प्रशंसा के लिए भी मनाया जाता है।

छठ पूजा कौन सा देवता:

छठ पूजा में सूर्य देवता और छठी माता की पूजा की जाती है। सूर्य को जीवन का स्रोत माना जाता है, जो हर जीवन रूपी पौधे और प्राणी के लिए आवश्यक है। छठी माता सूर्य की पत्नी मानी जाती हैं, और उन्हें संतान सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है।

छठ पूजा विचार:

छठ पूजा, भारतीय संस्कृति में एक प्रमुख त्योहार है, जिसमें सूर्य और छठी माता की पूजा की जाती है। इस त्योहार का मुख्य विचार सूर्य के प्रति श्रद्धा और आभार है, जो हमारे जीवन का मुख्य स्रोत है। सूर्य को जीवन दाता माना जाता है और इस पूजा में उसे धन्यवाद दिया जाता है। विचारशील भावना से, छठ पूजा हमें प्रकृति और उसकी अनमोलता के प्रति समझाने का कार्य करती है। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि हमें प्रकृति के प्रति जिम्मेदार और समझदारी से व्यवहार करना चाहिए।

छठ पूजा के दिन बचे हैं:

छठ पूजा की तारीख का इंतजार सभी भक्तों को होता है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आती है, उत्साह और तैयारियाँ बढ़ती जाती हैं। इस त्योहार की खास बात यह है कि यह सूर्य और उसके शक्तियों की पूजा के लिए मनाया जाता है।

छठ पूजा के दिन:

छठ पूजा का महत्वपूर्ण दिन षष्ठी तिथि होता है, जिस पर सूर्य और छठी माता की पूजा की जाती है। इस दिन लोग सूर्य को अर्घ्य देते हैं और व्रत रखते हैं।

छठ पूजा मूर्ति:

छठ पूजा में किसी विशेष मूर्ति की पूजा नहीं होती, बजाय इसके सूर्य और छठी माता की प्रतिमा की पूजा की जाती है। इस त्योहार में सूर्य की किरनों को पूजा जाता है।

छठ पूजा कैलेंडर:

छठ पूजा प्रतिवर्ष हिन्दी मास ‘कार्तिक’ की षष्ठी तिथि पर मनाई जाती है। इसे हिन्दी पंचांग अनुसार तय किया जाता है। छठ पूजा का त्योहार दिवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है। कैलेंडर के अनुसार छठ पूजा की तारीख हर साल परिवर्तित होती है, लेकिन यह हमेशा कार्तिक मास में ही मनाई जाती है।

छठ पूजा में क्या होता है:

छठ पूजा में भक्त सूर्य और छठी माता की पूजा करते हैं। इस त्योहार में विशेष रूप से घात पर पूजा की जाती है, जहां पूजारी और परिवार के सदस्य विशेष गीत गा कर पूजा करते हैं। इस त्योहार में विशेष प्रकार की मिठाइयाँ और प्रसाद तैयार किए जाते हैं।

छठ पूजा का कितना दिन है:

छठ पूजा का त्योहार चार दिनों तक चलता है। पहले दिन ‘नहाय खाय’ होता है, दूसरे दिन ‘लोहंडा और खरना’, तीसरे दिन ‘संध्या अर्घ्य’ और चौथे दिन ‘प्रातः अर्घ्य’ होता है।

भारत में छठ पूजा 2023 समारोह मनाने के लिए सर्वोत्तम स्थान

छठ पूजा ज्यादातर भारत के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में मनाई जाती है। कुछ प्रसिद्ध स्थान हैं:

1. छठ पूजा 2023 समारोह:

छठ पूजा, जिसे सूर्य और छठी माता की पूजा के रूप में जाना जाता है, उत्तर और पूर्वी भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह त्योहार प्रकृति के संरक्षण और संजीवनी शक्तियों की प्रशंसा करता है। 2023 में यह त्योहार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि लोग इसे वातावरण संरक्षण और जल संजीवनी शक्ति की महत्व के साथ जोड़ रहे हैं।

2. पूरे भारत में छठ पूजा का उत्सव:

छठ पूजा का उत्सव पूरे भारत में विशेष रूप से उत्साहित होता है। यहां तक कि उन राज्यों में भी जहां यह पारंपरिक रूप से मनाया नहीं जाता, वहां भी बिहार और झारखंड के लोग इसे मनाते हैं। इसके अलावा, अन्य देशों में भी जहां भारतीय उपनिवेश हैं, वहां भी छठ पूजा का उत्सव मनाया जाता है।

3. छठ पूजा परंपराएं और अनुष्ठान:

छठ पूजा में कई परंपराएं और अनुष्ठान होते हैं। पहले दिन ‘नहाय खाय’ होता है, जिसमें भक्त स्नान करते हैं और विशेष प्रकार का भोजन तैयार करते हैं। दूसरे दिन ‘खरना’ होता है, जिसमें व्रती निर्जला उपवास रखते हैं। तीसरे दिन ‘संध्या अर्घ्य’ होता है, जिसमें सूर्य को अर्घ्य चढ़ाया जाता है। और चौथे दिन ‘पारण’ होता है, जिसमें उपवास खोलने की प्रक्रिया होती है।

4. ठेकुआ – छठ पूजा की प्रमुख मिठाई:

ठेकुआ छठ पूजा की प्रमुख मिठाई है। यह गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनाई जाती है। इसका स्वाद बेहद अद्वितीय और स्वादिष्ट होता है।

5. छठ पूजा में प्रमुख स्थल:

बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश छठ पूजा में प्रमुख स्थल हैं। इन राज्यों में इस त्योहार को बड़े धूमधाम और भक्ति भावना के साथ मनाया जाता है।

6. बिहार में छठ पूजा:

बिहार, छठ पूजा के उत्सव का केंद्रीय बिंदु है। पटना, गया, भागलपुर और अन्य शहरों में यह त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है। घाटों पर लाखों लोग सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जमा होते हैं। बिहार में छठ पूजा का समारोह विशेष रूप से धार्मिक भावना, संगीत और लोक नृत्य के साथ मनाया जाता है।

7. झारखंड में छठ पूजा:

झारखंड में भी छठ पूजा को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, खासकर रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे शहरों में। यहां के लोग त्योहार के अवसर पर घाटों पर जमा होते हैं और संगीत, नृत्य और पूजा के माध्यम से उत्सव को मनाते हैं।

8. उत्तर प्रदेश में छठ पूजा:

उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ पूजा का महत्व है। वाराणसी, गोरखपुर और अन्य क्षेत्रों में लोग नदी घाटों पर जमा होते हैं और विशेष रूप से तैयार किए गए गीतों और नृत्यों के साथ त्योहार को मनाते हैं।

छठ पूजा, न केवल एक त्योहार है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व का पर्व है जो हमें प्रकृति, सृजन और उसकी अद्वितीयता की याद दिलाता है।

निष्कर्ष:

छठ पूजा भारतीय संस्कृति में एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसमें सूर्य और छठी माता की पूजा की जाती है। यह त्योहार न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इसे मनाने से लोगों में परस्पर समर्थन, साझा और एकता की भावना बढ़ती है। इसके अलावा, यह त्योहार हमें प्रकृति और उसकी अनमोलता के प्रति समझाने का कार्य भी करता है, और हमें प्रकृति के प्रति अधिक समझदारी और जिम्मेदारी से व्यवहार करने की प्रेरणा देता है।

छठ पूजा संबंधित प्रश्नोत्तर (FAQs):

क्या है छठ पूजा?

छठ पूजा एक हिन्दू त्योहार है जिसमें सूर्य और छठी माता की पूजा की जाती है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

छठ पूजा कब मनाई जाती है?

छठ पूजा प्रतिवर्ष कार्तिक मास की षष्ठी तिथि पर मनाई जाती है।

क्यों मनाई जाती है छठ पूजा?

छठ पूजा सूर्य और छठी माता की पूजा के लिए मनाई जाती है, जो जीवन और प्रकाश के स्रोत माने जाते हैं। इससे स्वास्थ्य, समृद्धि और शुभकामनाओं की प्राप्ति की आशा की जाती है।

छठ पूजा में कौन-कौन से विधान होते हैं?

छठ पूजा में ‘नहाय खाय’, ‘लोहंडा और खरना’, ‘संध्या अर्घ्य’, और ‘प्रातः अर्घ्य’ जैसे विधान होते हैं।

क्या है छठ पूजा की महत्वपूर्ण तिथियाँ 2023 में?

2023 में छठ पूजा की षष्ठी तिथि 18 नवंबर को सुबह 09 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होगी और 19 नवंबर को सुबह 07 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी।

आपके पास और कोई प्रश्न हो तो कृपया बताएं।


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